ठेका श्रमिकों का शोषण बंद करें

Author: BMS      Date: 27 Aug 2018 17:54:44

प्रस्ताव

ठेका श्रमिकों का शोषण बंद करें

      ठेका श्रमिकों की बढ़ती संख्या तथा इनके शोषण एवं उत्पीड़न से पूरे श्रमिक क्षेत्र में भारी आक्रोश है | ठेका श्रम अधिनियम की अवधारणा में स्पष्ट किया गया है कि, यथासंभव ठेका श्रम को समाप्त किया जाय तथा जहाँ ठेका श्रम समाप्त करना व्यवहारिक/संभव न हो तो ऐसी परिस्थितियों में ठेका श्रम की कार्य करने की स्थितियों में सुधार करते हुए उस कार्य स्थल पर कार्यरत श्रमिकों को देय परिलाभों को मिलना सुनिश्चित किया जाय ,किन्तु उपरोक्त अवधारणा का किसी भी स्तर पर पालन नहीं हो रहा है |भारतीय मजदूर संघ अपने कटक राष्ट्रीय अधिवेशन ,2008 से ठेका प्रथा के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है | आजकल निजी एवं सार्वजानिक संस्थानों के साथ-साथ राज्यएवं केंद्र के विभागों में भी स्थाई पदों को समाप्त कर संविदा नियोजन की प्रवृति बढ़ गई है | नई भर्ती पर सरकारी प्रतिबंध के कारण भी सरकारी विभागों में स्थाई कर्मचारियों की कमी पूर्ति के साथ-साथ ठेका प्रथा को मुनाफा कमाने का माध्यम बनाकर इसका तेजी से विस्तार किया है |ठेका श्रम भारत में रोजगार का (default) स्थापित नमूना बन गया है |आज संगठित क्षेत्र के 67% श्रमिक इस श्रेणी से संबंधित हैं |उप अनुबंध (sub-contract)और आपूर्ति श्रृंखला (supply chain)रोजगार के उभरते वैश्विक नमूना बन रहें हैं | ठेका श्रमिकों के संघर्ष और लगातार श्रम क्षेत्र में अशांति की हालिया घटनाएँ बढ़ रही है |वर्ष 2008 की मारुति उद्योग मानेसर ,हुंडई तथा होंडा उधोग की घटनाएँ उसका ज्वलंत उदाहरण है | समय रहते यदि इसका समाधान नहीं हुआ तो देश में पुनः बंधुआ मजदूर जैसी नई परिस्थितियों का निर्माण होगा ,जिसमें मजदूरों के मूल अधिकारों की कोई सुरक्षा नहीं होगी |

       श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन ठेका श्रम में बढ़ रहा है |चूंकि ठेका मजदूर ज्यादातर अशिक्षित एवं गरीब परिवारों से आतें हैं, इसलिए वे श्रम कानूनों एवं उनके लाभों से अनजान होतें हैं |इन संविदा श्रमिकों को सभी सुविधाओं से वंचित रखा जाता है |ठेका श्रम के शोषण के नित्य नए तरीके अपनाएं जा रहें हैं |आज ठेका श्रमिकों को बैंक के माध्यम से मिलने वाले वेतन को ,भुगतान करने से पूर्व हीं नियोक्ता द्वारा श्रमिकों से हजारों रुपए नगद वापस ले लिए जाते है या श्रमिक का बैंक एटीम (ATM) कार्ड नियोक्ता अपने कब्जे में रखता है |CLRA एक्ट 1970 के केन्द्रीय (रूल्स)25(2)(v)(a) के अनुसार उच्च न्यायलय / ठेका श्रम सलाहकार बोर्ड द्वारा आदेश देने के बाद भी समान काम का समान वेतन नियम लागू नहीं  किया जाता है |भारत सरकार अधिनियम की धारा 25(2)(v)(a) में संशोधन कर ठेका श्रमिकों पर कुठाराघात कर रही है |समान काम के लिए स्थाई श्रमिकों को जो वेतन मिलता है उसका एक-चौथाई से भी कम ठेका श्रमिकों को भुगतान किया जाता है |विशेष रूप से गैर अनुसूचित नियोजनों में ठेका श्रमिक को न्यूनतम वेतन भी भुगतान नहीं किया जाता है |सरकारी विभागों में जब सरकार की मर्जी होती है ,न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण (REVISION) करती है |समय-समय पर बढ़ने वाले महंगाई भत्ते से ठेका श्रमिक को वंचित रखा जाता है |इन श्रमिकों को किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा तथा पेंशन, चिकित्सा भत्ता, ग्रेच्युटी,अवकाश आदि नहीं मिल पाती है |इनके भविष्य निधि भुगतान करने के नियमों की पालना नहीं होती है |ठेका श्रमिक को नियमानुकूल ओवरटाइम,वेतन,बोनस आदि का सही भुगतान नहीं हो पाता है |

       केन्द्रीय परिधि में आने वाले उद्योगों में भी केन्द्रीय न्यूनतम वेतन लागु करने के स्थान पर उन केन्द्रीय प्रतिष्ठानों द्वारा राज्यों का न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाता है ,जो केन्द्र के न्यूनतम वेतन से काफी कम है ,जैसे स्टील,रेल,दूरसंचार इत्यादि में होता है |ग्रेच्युटी के भुगतान से बचने हेतु उद्योगों में संविदा को अल्प अवधि में बदल दिया जाता है |

वर्षों-वर्ष एक उद्योग में कार्य करने के बाद भी श्रमिक ग्रेच्युटी (उपादान)के लिए पात्रता (ELIGIBILITY)पूरी नहीं कर पाता |कार्य के अनुरूप पदनाम का उल्लेख न करना जैसे-:वेल्डर,फिटर,ओप्रेटर,हैल्पर आदि पदों के स्थान पर अकुशल,अर्धकुशल,कुशल पदनाम हीं दर्ज हो रहें हैं | वर्षो-वर्ष कार्य करते रहने के बाद भी ठेका श्रमिक एक हीं पद पर बना रहता है |इनके पदोन्नति की कोई व्यवस्था नहीं है | कार्य छिन जाने के डर के कारणों से भी ठेका श्रमिकों का शोषण बढ़ा है |

      CACLB के द्वारा ठेका श्रम को प्रतिबंधित करने के निर्णयों को उद्योगों द्वारा न्यायलय में चुनौती (CHALLENGE)देकर वर्षो-वर्ष मामले को उलझा कर रखा जाता है एवं उनका पालन करने से बचा जाता है |अधिनियम की धरा 1(5)में लिखा गया है कि, ऐसे कार्य जो वर्ष में 120 दिन या इससे अधिक दिन सम्पन्न होता हो ,उस कार्य को स्थाई प्रकृति का माना जायगा |लेकिन उक्त नियम का पालना नहीं होती है | CLRA एक्ट की धारा -4 के अनुसार राज्यों में ठेका श्रम सलाहकार मंडलों के गठन का आभाव में ,राज्यों के सभी संस्थानों द्वारा ठेका श्रमिकों का शोषण किया जाता है | वर्तमान में न्यायोचित एवं उपयुक्त मामलों में भी मंडल द्वारा क़ानूनी प्रावधान के अनुसार ठेका श्रम समाप्त करने की अनुशंसा नहीं की जाती है | आजकल सरकारी संस्थानों को CLRA अधिनियम की धारा 35 के माध्यम से सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों से खुली छुट दी जा रही है | यह कानून श्रमिक को शोषण एवं उत्पीड़न से मुक्ति दिलाने में असफल हो रहा है |आज पूरे देश में संगठित एवं असंगठित दोनों क्षेत्रों में इस प्रकार के ठेका श्रमिकों की संख्या का तेजी से विस्तार हो रहा है |साथ हीं 16 मार्च 2018 को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की अधिसूचना से नियत अवधि रोजगार को क़ानूनी दर्जा मिलने से बेरोजगारी बढने के साथ हीं श्रमिकों के जीवनयापन को प्रभावित करने वाला है |इस कानून के तहत उद्योगों ने सेवानिवृत कर्मचारियों को नियत अवधि के रोजगार को उपलब्ध कराने से नए युवा बेरोजगारों की संख्या बढ़ी है | इसलिए ठेका श्रम को शोषण मुक्त करने की हिमालयी चुनौती का सामना करने के लिए अब हमें खड़ा होना होगा |

         अतः कोचीन में आयोजित भारतीय मजदूर संघ की 142 वीं केन्द्रीय कार्य समिति बैठक राज्य एवं केंद्र सरकारों से मांग करती है:-

  • तत्काल केन्द्रीय ठेका श्रम सलाहकार मंडल CACLB की बैठक बुलाई जाय और ठेका श्रम के व्यापक शोषण को रोकने के लिए कदम उठाए जाएँ |
  • राज्य ठेका श्रम सलाहकार मंडलों के गठन के क़ानूनी प्रावधान की पालना सुनिश्चित की जाय |
  • अधिनियम के प्रावधानों के उलंघन पर ठेका श्रमिक को नियमित करने का प्रावधान किया जाए एवं प्रमुख नियोक्ता को अधिक उत्तरदायित्व माना जाए |
  • ठेका श्रमिकों की बढ़ती तादाद को देखते हुए इसकी भर्ती (नियोक्ति) हेतु अधिनियम में संशोधन किया जाय |
  • समान काम का समान वेतन के प्रावधान को केन्द्रीय नियमों (Rule) के स्थान पर अधिनियम (Act) में शामिल किया जाय तथा इसकी पालना को अनिवार्य किया जाए |
  • समस्त उद्योगों के अल्प कालीन नियोजनों में कम से कम तुरन्त न्यूनतम का प्रावधान लागु किया जाय |
  • ठेका श्रमिकों को बोनस, कर्मचारी भविष्य निधि, कर्मचारी राज्य बीमा योजना, पेंशन, ग्रेच्युटी आदि परिलाभ मिलना सुनिश्चित करें |
  • अधिनियम की धरा 7 एवं 12 का उल्लंघन होने पर ठेका श्रमिकों को मुख्य नियोक्ता का श्रमिक माना जाय तथा ऐसी परिश्थिति में ठेका श्रमिक को नियमित करने का प्रावधान अधिनियम में किया जाय |
  • सभी टेका मज़दूरों को स्थायी किया जय |
  • निश्चित अवधि रोजगार का नोटिफिकेशन को तुरंत प्रभाव से वापस ले |

निश्चित अवधि रोजगार का नोटिफिकेशन वापस लेने एवं टेका मज़दूरों का शोषण बंद करने केलिए तुरंत कदम उठाने केलिए राज्य एवं केंद्र सर्कार के ऊपर दबाव बनाने केलिए भा. म. सं. ने देश भर के जिल्ला केंद्रों पर ६ सितम्बर २०१८ को विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया हैं।

प्रस्तावक :-बृज बिहारी शर्मा ,महामंत्री ,भरतीय ठेका मजदूर महासंघ

समर्थक :- राजबिहारी शर्मा ,अखिल भारतीय मंत्री ,भारतीय मजदूर संघ

 

                 

    

 
[email protected] Bharatiya Mazdoor Sangh