25 मार्च सर्व पंथ समादर दिवस। अमर शहीद श्री गणेश शंकर विद्यार्थी को शत् शत् नमन!

25 मार्च सर्व पंथ समादर दिवस। अमर शहीद श्री गणेश शंकर विद्यार्थी को शत् शत् नमन!

25 मार्च: सर्वपंथ समादर मंच, गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस को समाज समत्व दिवस के रूप में मना रहे हैं।
गणेश स्वाभाविक रूप से तीव्र देशभक्त ,राष्ट्रभक्त थे।
कानपुर में हुए हिंदू -मुस्लिम झगड़े में सभी व्यक्तियों की रक्षा व शांति के लिए झगड़े के बीच में एक-एक घर जाकर सबको शांति व आश्वासन देने की लिए उन्होंने कोशिश की थी। 1931 मार्च में लखनऊ में हिंदू मुस्लिम झगड़ा शुरू हुआ। 500 से अधिक लोग मारे गए ।बहुत अधिक संपत्ति नष्ट हो गई । 24 मार्च को कानपुर में झगड़ा आरंभ हुआ ।24 मार्च की रात को और 25 मार्च सुबह स्थितियां बहुत अधिक बुरी हो गई। यह जानकर गणेश जी वहां निकले, करीब 50 लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाया।
25 मार्च सुबह 3:00 बजे होने पर झगड़ा बंगाली गली, इटावा मार्केट आदि स्थानों में व्याप्त हो गया गणेश जी बिना कुछ लाभ की चिंता किए काम में लग गए ।उन्होंने स्त्रियों सहित करीब 150 मुसलमानों को सुरक्षित स्थान पहुंचाया। हिंदू -मुस्लिम भेदभाव के बिना सबकी मदद की। मुसलमानों ने गणेश जी के साथ के वालंटियर पर आक्रमण किया तो उन्होंने उनसे कहा “तुम वालंटियर का उपद्रव मत करो। उन्होंने सैकड़ों मुसलमानों की रक्षा की है। मैं तुम्हारी रक्षा के लिए ही आया हूं ।जो कुछ भी हो जाए मैं नहीं लौटूंगा। मेरी मृत्यु से तुम संतृप्त हो जाओ तो मैं उसमें खुश हूं । यह सुनते ही लोगों ने उन्हें मारा । जब आक्रमण बढ़ गया वे थककर गिर गए और एक मुसलमान ने उन्हें लेकर सड़क के किनारे पर लेटा दिया।
27 वाँ दिन उनका मृतशरीर मिला। उनकी मृत्यु का समाचार पाकर जवाहरलाल नेहरू ने अपने प्रतिनिधि पुरुषोत्तम दास टंडन और बालकृष्ण शर्मा को वहांँ भेजा। 29 सुबह उनका शवदाह हो गया। गणेश जी के बलिदान के बाद के सम्मेलन में नेहरू ने उनका अनुस्मरण किया । महात्मा जी ने कहा- “हमारा अहिंसा सिद्धांत भीरु के, दुर्बल के, निराश्रय के, गच्छर के अहिंसा सिद्धांत नहीं। हम अहिंसा में और विश्वास करते हैं । फिर भी उनके साधक होते ही संदर्भ के अनुसार विरत्वभाव से गणेशशंकर विद्यार्थी जी के समान धीर होना चाहिए। आज हमारे बीच में कितने गणेश शंकर विद्यार्थी होंगे ?? अहिंसा के उच्च आदर्शों से युक्त गणेश शंकर विद्यार्थी हमारे ह्रदयो में बसनेवाले इतिहास है।
उन्हें समाज की मित्रता राष्ट्र सेवा और राष्ट्र की आजादी के लिए संप्रदायों के बीच के झगड़े में खुद बलिदान करना पड़ा गणेश जी ने जीवन भर समाज नीति के लिए काम की एक व्यक्ति का उच्च बलिदान है।
इसलिए भारतीय मजदूर संघ 25 मार्च को सर्वपंथ समादर मंच दिन मनाता है।

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