इस्पात उद्योग में नवरत्ना और महारत्ना कम्पनियों को भी विनिवेश और निजीकरण करने की सरकार की ओर से कवायद

इस्पात उद्योग में नवरत्ना और महारत्ना कम्पनियों को भी विनिवेश और निजीकरण करने की सरकार की ओर से कवायद

इस्पात के क्षेत्र में वाइजाग स्टील प्लांट, विशाखापत्तनम के लिए सरकार बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के एक तरफा निर्णय को इस्पात उद्योग के कर्मचारियों ने अमान्य कर आन्दोलनात्मक रुख अपनाया है।
आज देश के सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को निजी हाथों में देकर पूंजीपतियों को फलने – फूलने के लिए स्वतंत्र करने जैसा होगा। पहले तो विमार व घाटे वाली उद्योगों को विनिवेश के लिए सूचीबद्ध किया गया था और अब मुनाफे वाले उद्योगों को विनिवेश व निजीकरण करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। मिनीरत्ना हो या महारत्ना या नवरत्ना क्या यह सभी उद्योग राष्ट्र के लिए नुकसानदायक हैं ? सरकार को एक बार कोरोना जैसे महामारी फैलने पर लाॅकडाउन के दौरान यही निजी उद्योगपति/ पूंजीपतियों ने अपने को नुकसान से बचाने के लिए अपने उद्यमों को बन्द कर मजदूरों को भुख से मरने के लिए बेसहारा कर दिया था लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों का सहारा बरकरार रहा। राष्ट्र की अस्मिता से खेलने वाले आबाद हो और राष्ट्रहित में लगे मजदूर और उद्योग बर्बाद हो ऐसा निर्णय देश के ब्यूरोक्रेट्स का हो सकता है यह राष्ट्र हितैषी चिंतन नहीं हो सकता। सरकारी मंत्रालयों में बैठे ब्यूरोक्रेट्स एक समय में उदारीकरण, निजीकरण व वैश्वीकरण के लिए तत्कालीन सत्तासीन दल के लोगों को विकास करने का राह दिखाने का काम किया था। आज वही प्रगतिशील लोग राष्ट्र को अस्त-व्यस्त कर रहे हैं। सरकारी हो या सार्वजनिक क्षेत्र सभी उद्योगों में शाहीन बाग और किसान आन्दोलन जैसी स्थिति पैदा होने की भी आशंका है।
देश के सार्वजनिक क्षेत्र में इस्पात उद्योग में नवरत्ना और महारत्ना कम्पनियों को भी विनिवेश और निजीकरण करने की सरकार की ओर से जो कवायद हो रही है उस पर रोक लगनी चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में किसानों के लिए तीन कानून की प्रतियां जलाई जाती है और बाकी वह सभी नारे बुलंद हो रहें हैं जो उस उद्योग में उसका कोई महत्त्व नहीं रखता ऐसा होना राष्ट्रहित का कार्य नहीं है।
इस्पात उद्योग से विनिवेश और निजीकरण बदले कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाने का प्रयास किया जाना चाहिए और उद्योगों को लाभकारी बनाने के लिए प्रबंधन पर शिकंजा कसने का कार्य करें।
उद्योगों को रुग्ण व हानिप्रद बनाने में उस उद्योगों का बाजार व मशीनों का नवीनीकरण अहम है। आधुनिकीकरण के नाम पर बहुपक्षीय लूट मचाने वाले तत्व ही उद्योगों को विमार बनाया है। इस पर नियंत्रण रखने में सार्वजनिक क्षेत्र की व्यवस्था नाकाम रही है।
राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड की नवरत्ना इकाई वाइजाग स्टील प्लांट, विशाखापत्तनम जो लाभकारी संस्थान है उसे घाटे वाली इकाई बताकर “पास्को” के साथ में देने का निर्णय कतई राष्ट्रहित में नहीं है।
वाइजाग स्टील, विशाखापत्तनम को पास्को के हाथ में जाने से रोका जाय। इस्पात उद्योग के “सेल व आर आई एन एल के कर्मचारियों को उनका वेतन समझौता शीघ्र कर उनके उत्साह को बढ़ावा देने से और प्रबंध पर लाभकारी बनाने के बाध्य करने से उद्योग राष्ट्र के लिए कृतिमान सिद्ध होंगे। ऐसा ही होना चाहिए।
भारत सरकार से निवेदन है कि राष्ट्रहित उद्योग हित में कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाएं। अन्यथा इस्पात उद्योग के कर्मचारी आन्दोलन में जाने के लिए बाध्य होंगे।
देवेन्द्र कुमार पाण्डेय
उद्योग प्रभारी
भारतीय मजदूर संघ