एकात्म मानवदर्शन” के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उनको ह्रदय से कोटि कोटि नमन

एकात्म मानवदर्शन” के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उनको ह्रदय से कोटि कोटि नमन

समाज के विभिन्न अंगोंमे सामंजस्य बने, गतिविधी परस्परपूरक हो। अंतर्विरोध समाप्त हो। समाज जीवन स्नेहमय हो।  समाज की रचना चैतन्य भरे शरीर के समान हो। समाज जीवन धर्माधिष्ठित- अपने अपने दायित्व का वहन करने वाला हो। निरंतर चले। सारे सहोदर है, यह अंतर्मन विलसता रहें। हम सब इस एकात्मता की खोज मे है।  विविधता को अपनी ताकद बना, अगर भारत इस रुप मे खडा होता है, तो विश्व के जीवन को समरस बनानेवाली यह पहल होगी।
यह “एकात्म मानव दर्शन ” का अंतरंग है।
इस चिंतन को जमीनपर उतारा जा सकता है।
अपने कार्यक्षेत्र से हम शुरूआत कर सकते है। हम आर्थिक क्षेत्र मे है। और यहॉ हित संबंधाें के स्थायी टकराव के वामपंथी विद्वेषी चिंतन की प्रस्तूती हुवी और वह नाकाम हुवी। इस लिये दुनिया भ्रमित है। इस लिये चिंतन को ठीक करने का दायित्व अपना बनता है।

आज स्व. दीनदयाल जी का पुण्यस्मरण दिवस है। वह भा. म. संघ के लिये संकल्प दिन बनें .

एकात्म मानवदर्शन” के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की पुण्यतिथि पर उनको ह्रदय से कोटि कोटि नमन….
“भारत माता की जय”