We join the Nation in paying tribute to Pt Deendayal Upadhyayji, on his 105th Birth Anniversary.

We join the Nation in paying tribute to Pt Deendayal Upadhyayji, on his 105th Birth Anniversary.

His thoughts & vision for India will be cherished for centuries to come. Deendayal Upadhyay was an eminent Bharatiya thinker, economist, writer, editor, political scientist, journalist, sociologist, historian, thinker, employer and philosopher, social worker and politician. He was one of the leading lights of the Bharatiya Ideology.

दीनदयाल जी का एकात्म मानवदर्शन —-

दीनदयालजी पुंजीवाद औऱ समाजवाद दोनों विचारधाराओं को भारत के लिये अनुपयक्त औऱ अव्यवहारिक मानते थे। उनका मानना था क़ि भारत को सुचारु रूप से चलाने के लिये नीति निर्देशक सिद्धांत भारतीय दर्शन के आधार पर ही हो सकता है। वे पश्चिमी जगत मे जन्मे सिद्धांतो के विरुद्ध मानव औऱ समाज को विभाजित करके देखने के पक्षधर नही थे। उनका विचार था, मानव अस्तित्व के चार अवयव होते हैं, शरीर, मान, बुद्धी औऱ आत्मा, जिनके माध्यम से जीवन के चार मौलिक उद्देश्यों,काम,अर्थ,धर्म और मोक्ष को प्राप्त किया जाता है। इनमे से किसी क़ि अवहेलना नही क़ी जा सकती।किन्तु मनुष्य एवम समाज के लिये धर्म आधारभूत है, औऱ मोक्ष अतिंम लक्ष्य है। पश्चिमी पुंजीवादीऔऱ समाजवादी सिद्धांत मात्र शरीर औऱ मान की आवश्यकताओं की पूर्ती तक ही केंद्रित है। जब कि मानव औऱ समाज के संपूर्ण विकास के लिए भौतिक और आध्यात्मिक विकास आवश्यक है l

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *